Ghazal · Urdu, in Devanagari
सब पता है रहनुमा हमको कहाँ ले जायेंगे,
हाँक कर हमको अंधेरों में, शमा ले जायेंगे।
दोपहर में अब न सोया कीजिये यूँ बेधड़क,
दिन दहाड़े आपका सूरज उठा ले जायेंगे।
यूँ न दुखड़ा रोते रहिए हर किसी के सामने,
वो करेंगे कुछ नहीं, केवल मज़ा ले जायेंगे।
जगलरी फ़ैशन में है,अय्यारियों का दौर है,
वो नज़र में से नज़रिया तक चुरा ले जायेंगे।
आज के अख़बार हैं, इन पर भरोसा कीजिये,
इश्तिहारों में कहीं सच को दबा ले जायेंगे।
आँधियां बनने नहीं देतीं चराग़ाँ आजकल,
फिर बवंडर चाक से मिट्टी उड़ा ले जायेंगे।